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कम उम्र में हार्ट अटैक क्यों? भारतीय युवाओं के लिए क्या कहती हैं रिसर्च

October 21, 2026

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कम उम्र में हार्ट अटैक क्यों? भारतीय युवाओं के लिए क्या कहती हैं रिसर्च

क्या आपको लगता है कि हार्ट अटैक का खतरा 50 साल की उम्र के बाद ही होता है? अब इस सोच को बदलने का समय है।


भारत में डॉक्टर कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले देख रहे हैं। हालांकि, हर युवा को इसका खतरा नहीं होता, लेकिन शोध बताते हैं कि भारतीयों और दक्षिण एशियाई लोगों में कई अन्य आबादी की तुलना में कम उम्र में ही दिल की धमनियों से जुड़ी बीमारी विकसित हो सकती है। इसके पीछे सिर्फ जीवनशैली ही नहीं, बल्कि आनुवंशिक कारण, मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी समस्याएं और रोज़मर्रा की आदतें भी हो सकती हैं।

रिसर्च क्या बताती है?

Indian Heart Journal में 2024 में प्रकाशित एक भारतीय अध्ययन में हार्ट अटैक के एक गंभीर प्रकार, ST-एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (STEMI), से पीड़ित लोगों का अध्ययन किया गया। NORIN-STEMI रजिस्ट्री के तहत शामिल 3,635 मरीजों में लगभग एक-तिहाई की उम्र 50 साल से कम थी, जबकि 27% मरीज 40 साल से कम उम्र के थे। कम उम्र के मरीजों में धूम्रपान और मोटापा आम जोखिम कारक पाए गए।

हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय एक बात ध्यान रखना ज़रूरी है। इस अध्ययन में उन लोगों को शामिल किया गया था जिन्हें पहले ही हार्ट अटैक आ चुका था, न कि आम आबादी को। इसलिए इससे यह नहीं पता चलता कि भारत के कितने युवाओं को हार्ट अटैक होगा या देशभर में इसके मामले कितनी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

इससे पहले हुए अंतरराष्ट्रीय INTERHEART अध्ययन से भी अहम जानकारी मिलती है। इसमें दक्षिण एशियाई प्रतिभागियों को पहला हार्ट अटैक औसतन लगभग 53 साल की उम्र में आया, जबकि अन्य क्षेत्रों के प्रतिभागियों में यह उम्र करीब 59 साल थी। शोधकर्ताओं ने इसके पीछे खून में वसा के असामान्य स्तर, धूम्रपान, डायबिटीज़ और पेट के आसपास जमा चर्बी जैसे जोखिम कारकों की भूमिका बताई।
संदेश साफ है: दिल की सेहत का ख्याल बुढ़ापे का इंतज़ार किए बिना रखना चाहिए।

कम उम्र के भारतीयों में हार्ट अटैक का खतरा क्यों हो सकता है?
​​​कई कारण मिलकर दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

1. डायबिटीज़ और बढ़ा हुआ ब्लड शुगर
डायबिटीज़ समय के साथ रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होती है। इसलिए नियमित जांच ज़रूरी है।

2. बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर

खून में कोलेस्ट्रॉल अधिक होने पर धमनियों के अंदर चर्बी जमा हो सकती है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। ये दोनों समस्याएं सालों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं।

3. धूम्रपान और तंबाकू का सेवन

धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और खून में थक्के बनने की आशंका बढ़ाता है। तंबाकू का सेवन हार्ट अटैक का एक प्रमुख जोखिम कारक है, जिसे रोका जा सकता है। यह खतरा कम उम्र के लोगों में भी रहता है।

4. लंबे समय तक बैठे रहना और कम शारीरिक गतिविधि

​​​​​​डेस्क पर घंटों काम करना, लंबे समय तक सफर करना और व्यायाम की कमी से स्वस्थ वज़न बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इससे ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर भी प्रभावित हो सकते हैं। नियमित रूप से चलना-फिरना इन जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है।

5. पेट के आसपास चर्बी और खानपान

कमर के आसपास अधिक चर्बी जमा होने का संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस और दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे से है। नमक, नुकसानदायक वसा और अतिरिक्त चीनी से भरपूर खानपान भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकता है।

6. परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास

अगर आपके करीबी रिश्तेदारों को कम उम्र में दिल की बीमारी हुई है, तो आपका जोखिम भी अधिक हो सकता है। कुछ लोगों को आनुवंशिक रूप से ऐसी स्थितियां मिलती हैं, जैसे फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया, जिसमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत बढ़ सकता है। स्वस्थ जीवनशैली ज़रूरी है, लेकिन इससे आनुवंशिक जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।

हार्ट अटैक के इन संकेतों को न करें नज़रअंदाज़
हार्ट अटैक हमेशा फिल्मों में दिखाए जाने वाले अचानक गिर पड़ने जैसे दृश्यों की तरह नहीं होता।
इसके कुछ आम संकेत हैं:

  • सीने में दबाव, जकड़न या बेचैनी।
  • दर्द का बांहों, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना।
  • अचानक या असामान्य रूप से सांस फूलना।
  • ठंडा पसीना आना, मतली या चक्कर महसूस होना।
  • अचानक बहुत कमज़ोरी महसूस होना या ऐसी बेचैनी जो ठीक न हो।

हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं। महिलाओं और डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों में कुछ असामान्य लक्षण भी दिख सकते हैं। कई बार सीने में तेज़ दर्द नहीं भी होता।
अगर हार्ट अटैक का संदेह हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतज़ार न करें और खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल न जाएं। समय पर इलाज से दिल की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है और जान बच सकती है।

हार्ट अटैक का खतरा कम करने के लिए क्या करें?
इसके लिए बहुत कठिन व्यायाम या एकदम परफेक्ट डाइट की ज़रूरत नहीं है। ऐसी आदतों से शुरुआत करें जिन्हें आप लंबे समय तक अपना सकें।
अगर आपकी सेहत अनुमति देती है, तो हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखें।

  • खाने में सब्ज़ियां, फल, दालें, साबुत अनाज, मेवे और कम प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच करवाएं।
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीके अपनाएं।
  • अगर परिवार में किसी करीबी को कम उम्र में दिल की बीमारी हुई है, तो इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें।

कम उम्र होने का मतलब यह नहीं कि आपको दिल की बीमारी नहीं हो सकती। लेकिन सिर्फ भारतीय होने या व्यस्त जीवनशैली के कारण हार्ट अटैक होना भी तय नहीं है।
रिसर्च से मिलने वाला सबसे अहम संदेश डरना नहीं, बल्कि समय रहते सतर्क होना है। अपने जोखिम कारकों को पहचानें, लगातार बने रहने वाले लक्षणों को गंभीरता से लें और बचाव को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
आपका दिल इस इंतज़ार में नहीं रहता कि आप बड़े होकर उसकी देखभाल शुरू करेंगे। फिर आप क्यों करें?
 

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